kab aaoge…

जाओगे तुम पता मुझे है ,

याद रहे पर 
मैं नितांत ही एकाकी हूँ 
जल्दी आना 
देख भी लेना कभी वक़्त से लड़ते लड़ते
गुज़र गया हूँ या बाकी हूँ 
जल्दी आना 
जीवन की मधुशाला में तुम भी आ जाना 
जश्न  करेंगे 
वर्ना मय मैं ,जाम भी मैं ,
मैं ही साकी हूँ 
जल्दी आना ………अनुराग 
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हर शख्स को पढने का , मेरा शौक

हर शख्स को पढने का , मेरा शौक या कह लो हुनर 
अच्छा हुआ जो कुछ भी था सब ले गयी तेरी नज़र 
आँखें बयां करती हैं शब्, लब सुबह , और दिल दोपहर 
अब कोई भी उजला नहीं है , शख्शियत के नाम पर ..
समझाता हूँ , पर माने तब न , खा ही जाता है ये ठोकर 
मत मचल , फिर से किसी को जानने का हठ न कर 
..दिल बस भी कर ….. बस भी कर …
-अनुराग

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ये मासूम चेहरा और वो ज़ालिम किस्से शायद वो

ये मासूम चेहरा और वो ज़ालिम किस्से 
शायद वो मेरी तरह तुम्हे इश्क नहीं करते 
क्यों ओढ़ लेते हो ये नकली वफादारों सा लिबास ,
अरे क़त्ल करते हुए भी तुम हमे कातिल नहीं लगते 
……अनुराग 
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दूर क्षितिज पर गिरते बादल दिल की भाप उठा

दूर क्षितिज पर गिरते बादल

 दिल की भाप उठा लाये 
उमडें अल्हड़ करने पागल,
 चुपके से आकर छा जायें 
सपनों  की परतो तले  दबी,
 धूमिल यादें रंगीं साये ,
हवा संग उड़ने की आपाधापी में,
 कहा रह गए थे कैसे हम बतलाएं 
तेज़ हवाओं से छुपकर ,
हौले हौले रिमझिम रिमझिम 
उस आँचल में फिर बरसेंगे 
गर मिल जाये ……….अनुराग 

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कभी इखलाक़ जो देखोगे ,हो जायेगा इश्क़ जो एहसान

कभी इखलाक़ जो देखोगे ,हो जायेगा इश्क़ 
जो एहसान करोगे हसीन  कर दोगे 
तुम्हारी मुहब्बत मिली तो खुदा मिल जायेगा 
मिले जो तुम ,करीम कर दोगे ……..अनुराग 

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jindagi aur manzilein

जिंदगी दर दर पे भटकाती रही मुझको ,
हर राह पे मिलते गये कुछ नए चेहरे ,सब मुसाफिर !
और मैं चलता गया ,हर मोड़ पर मुड़ने से पहले ,
सोचकर ,कुछ दूर मंजिल तक सफ़र की इंतिहा है ,
कभी खुद से पूछता हूँ ,कभी बिन पूछे ही सुनता ,
मंजिलों को कर ले जो हासिल तो क्या सच में मज़ा है ?
हवस के इस चक्रव्यूह में , जरुरत के साथ बढती 
रोज़ कुछ आगे खिसकती मंजिलों का पता क्या है ?
भरोसा उन पर किया है जो की कहतें हैं है ज़न्नत 
सारे अंधियारों के आगे रौशनी के दरमियाँ है 
ख़ैर अब तो खोने पाने छूटने का ग़म नहीं है 
आगे बढ़ के पीछे देखें उस तरह के हम नहीं हैं 
राह पर चल पड़े हैं अब जो रास्ते ही मंजिलें हैं 
और फिर सब मंजिलें मिलने के सुख किसको मिले हैं ?
——-ANURAG

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तन्हाई

आज फिर से मदहोश पड़ा हूँ मैं

बिना खुशबू ये हवा फिर से लौट आई है

मेरी “सांस”, मेरे पास चली आओ अभी

जैसे ये याद चली आई है

दिल बेचैन मेरा तुम्हें देखने को है

दूर होकर भी तू मेरी “परछाई” है

खुद से बेगाना हूँ ,है अब ये भी होश नहीं

ये मैं ही हूँ या मुझमें तू समायी है

तेरे ख्यालों मैं डूबा ,मैं भूल दुनिया को

वफ़ा तू ही बस , दुनिया ये बेवफाई है ,

मेरा कोई नहीं ,अब तो आ जा ,तुझ बिन

अकेला मैं हूँ ,बस बोझिल तन्हाई है

कितनी बोझिल ये तन्हाई है……

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